कौमी एकता की मिसाल : मुहर्रम पर ब्राह्मण परिवार के नेतृत्व में ग्रामीण उठाते हैं ताजिया

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

गिरिडीह । झारखंड का एक पंचायत कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहा है। यहां मुहर्रम पर ब्राह्मण परिवार के नेतृत्‍व में ग्रामीण ताजिया उठाते हैं। यह जिले के जमुआ प्रखंड की ऐतिहासिक ग्राम पंचायत पोबी है। यहां पूरे विधि विधान से एक ब्राह्मण परिवार मुहर्रम का ताजिया उठाते हैं। दरगाह में मिट्टी धराई से कर्बला तक के लिए एक मोजाव्वर मो उस्मान अंसारी के माध्यम से सारे रस्म को पूरा किया जाता है।

युवा समाजसेवी योगेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि पोबी में ब्रिटिश शासन में जमींदारी प्रथा से ही मुहर्रम पर ताजिया उठाया जाता रहा है। हालांकि जमींदारी प्रथा की समाप्ति के कुछ वर्षों तक यह बंद हो गया था। परवर दिगार की प्रेरणा और ग्रामीणों के सहयोग से उनके पिता जनार्दन पाण्डेय ने मुहर्रम पर ताजिया उठाना शुरू किया, जो अब तक जारी है। ताजिया पूरा गांव घुमाया जाता है। अखाड़ा लगता है। सभी समुदाय के लोग शामिल होते हैं। सभी ग्रामीणों का पूरा सहयोग मिलता हैं।

पोबी पंचायत कौमी एकता का मिसाल है। हिन्दू मुस्लिम दोनों कौम एक दूजे के पर्व त्यौहारो, सुख दुःख की घड़ी में शामिल होकर चट्टानी कौमी एकता का परिचय देते हैं, जो दूसरी पंचायत के मजहबी कट्टरपंथि‍यों के लिए सिख है। कोविड-19 के मद्देनजर इस वर्ष सादगी पूर्वक रस्म अदायगी की जा रही है। ताजिया और अखाड़ा नहीं निकाला जायेगा। एक दूजे के धर्मों का सम्मान करना ही मानवता का मुख्य उद्देश्य है। विभिन्न धर्म एक नदी के समान है, जिसका विलय खाड़ी और समुंदर में हो जाता है।

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