Tata Steel ने स्टील स्क्रैप सोर्सिंग के लिए एप ‘फेरोहाट’ किया लॉन्च

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

नई दिल्ली । टाटा स्टील के डिवीजन स्टील रिसाइकलिंग बिजनेस ने व्यापारियों से स्टील स्क्रैप प्राप्त करने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन (एप) ‘फेरोहाट’ लॉन्च किया है। यह एप कंपनी द्वारा भारत के स्क्रैप बाजार को व्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जबकि स्टील उद्योग के लिए स्क्रैप मेटल का एक विश्वसनीय स्रोत भी प्रदान करता है।

फेरोहाट एप स्क्रैप बेचने के लिए एक 24*7 लाइव मार्केट प्लेस है। यह उपयोगकर्ता के अनुकूल है। इसमें व्यापारिक लेनदेन के लिए बाजार, आपूर्तिकर्ता के खाते के स्नैपशॉट के लिए खाता, बाजार की महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए समाचार और सम्मान एवं प्रशंसा की पहल के लिए अभय जैसी सुविधा दी गयी है।

स्टील रिसाइक्‍ल‍िंग बिजनेस के चीफ योगेश बेदी ने कहा कि खरीदना और मेरा एक थका देने वाला मामला है। घंटे के हिसाब से कीमतें बदलती रहती है, जिससे उपयोगकर्ता आशंकित और असुरक्षित हो जाते हैं। फेराहाट एप लेनदेन को आसान बनाना है। यह उपयोगकर्ता के अनुकूल है। सबसे अच्छी बात है कि यह मौजूदा स्क्रैप यार्ड और व्यापारियों के साथ सहयोग करता है। उन्‍हें कीमतों में स्थिरता के साथ एक पारदर्शी मंच प्रदान करता है। अब इसे लेनदेन कुछ बटन के क्‍ल‍िक से किए जा सकते हैं।

फेरोहाट के लॉन्‍च और स्क्रैप मार्केट को डिजिटल करने के पीछे का प्रमुख सिद्धांत व्यापारियों के लिए एक सफल मंच प्रदान करना है। स्कैप मेटल में व्यापार के लिए एक पारदर्शी और मजबूत मंच प्रदान कर फेरोहाट इस व्यवसाय में अनिश्चितता के तत्व को खत्म कर देगा। यह एप एप्पल स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है।

बतातें चलें कि टाटा स्टील हरियाणा के रोहतक 0.5 मिलियन टन प्रति वर्ष की क्षमता वाला अत्याधुनिक स्‍क्रैप प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित कर रही है। यह रिसाइकलिंग प्लांट मुख्यतः नेशनल कैपिटल रीजन यानी एनसीआर और हरियाणा क्षेत्र से स्थानीय व्यापारियों के स्क्रैप यार्डों और छोटे एवं मध्यम स्टील उद्योगों के अलावा, कार, डिस्‍मेंटलर के साथ मिल कर व्यापार करेगा।

इस पहल के उद्देश्‍यों में एक उद्देश्य प्रोसेस किया गया, उच्च गुणवत्‍ता वाला लोहे का स्क्रैप उपलब्‍ध कराकर स्टील उद्योग के लिए अति-आवश्‍यक कच्चे माल की कमी को पूरा करना है, ताकि वर्तमान असंगठित स्क्रैप सप्लाई चेन को व्यवस्थित किया जा सके, आयात पर निर्भरता कम किया जा सके। पूरे वैल्‍यू चेन पारदर्शिता एवं दक्षता को बढ़ावा जा सके।

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