…तो इसलिए नहीं हो पा रहा है झारखंड पंचायत चुनाव, राह में है कई पेंच,16 दिसंबर को धरना देगी BJP

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  • झारखंड में पंचायतों का कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है
  • झारखंड में राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद लंबे समय से रिक्त है

दैनिक झारखंड न्यूज

रांची झारखंड में समय पर पंचायत चुनाव होने की रही सही आस भी अब समाप्त हो गई है। पंचायत चुनाव न होने का एक तकनीकी कारण भी है। झारखंड में राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद लंबे समय से रिक्त है, जब तक इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं होती चुनाव कराए नहीं जा सकते। क्योंकि पंचायत चुनाव कराने की सीधी जवाबदेही राज्य निर्वाचन आयुक्त की होती है। तकनीकी पेंच यह है कि राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति फिलहाल हो ही नहीं सकती। इसका कारण यह है कि राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति पैनल में नेता प्रतिपक्ष का होना भी जरुरी है। यह पद फिलहाल रिक्त है और राजनीतिक विवादों में उलझा हुआ है।

झारखंड में नेता प्रतिपक्ष का मामला विधानसभा के स्तर से पर लंबित है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष के लिए अपने विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी का नाम प्रस्तावित किया है, जिस पर जिच की स्थिति बनीं हुई है। इस प्रकरण पर स्पीकर को निर्णय लेना है। इधर, दल बदल मामले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने सुनवाई भी शुरू कर दी है।

यह स्पष्ट है कि यह मामला लंबा खिंचेगा

बाबूलाल मरांडी समेत अन्य दो विधायकाें प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को अपना पक्ष रखने को कहा गया है। दल बदल से जुड़ी पिछले न्यायाधिकरण की सुनवाई से यह स्पष्ट है कि यह मामला लंबा खिंचेगा। नेता प्रतिपक्ष नहीं होगा तो राज्य निर्वाचन आयुक्त का चयन नहीं हो सकेगा।

झारखंड में पंचायतों का कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है

बता दें कि झारखंड में पंचायतों का कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है। नियमानुसार इससे पहले चुनाव कराया जाना चाहिए लेकिन मौजूदा दौर में यह संभव नहीं दिखाई देता। अब यह चुनाव कब होंगे यह कहना मुश्किल है। इधर, मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने पंचायत चुनाव को कराने की मांग को लेकर विरोध का स्वर बुलंद किया है। राज्य में पंचायत चुनाव कराने समेत अन्य मुद्​दाें को लेकर भाजपा राज्य के सभी प्रखंडों में 16 दिसंबर को धरना देगी।

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