तेजप्रताप यादव देंगे तेजस्वी को चुनौती, पार्टी की मुसीबत बढ़ी

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दैनिक झारखंड न्यूज

पटना । राजद की बड़ी और ऐतिहासिक हार हुई है, तो तकरार भी छोटी और कमजोर नहीं होगी। अपने दम पर लोकसभा चुनाव की कमान संभालने वाले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को तेज प्रताप यादव की ओर से चुनौती मिलने वाली है। लंबे अंतराल से बंद चले आ रहे राजद के जनता दरबार को तेज प्रताप सोमवार से फिर खोलने वाले हैं। सुबह 10 बजे से दरबार लगाने की सूचना दी है। जनता की समस्याओं को वह जितना सुलझाने की कोशिश करेंगे, भाई और परिवार की समस्याएं उतनी ही बढ़ेंगी।

तेजस्वी को अपना अर्जुन और खुद को कृष्ण बताने वाले तेजप्रताप अपने छोटे भाई का नेतृत्व स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। टिकट बंटवारे में अपनी अनदेखी से आहत उन्होंने अपने अर्जुन की तुलना दुर्योधन से की थी। मथुरा-वृंदावन से नई आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर लौटे तेज प्रताप जनता दरबार में अपने अर्जुन को निशाने पर रख सकते हैं। महागठबंधन की हार के लिए जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। लोकसभा चुनाव के इतिहास में पहली बार राजद के जीरो पर आउट होने के बाद तेजप्रताप के तेवर में तल्खी बढऩे के पूरे आसार हैं।

बिहार में हार के लिए तेज प्रताप को भी जिम्मेवार माना जा रहा है

राजद का खाता नहीं खुलने देने के लिए तेज प्रताप को भी जिम्मेवार माना जा रहा है। टिकट में हिस्सेदारी नहीं मिलने पर उन्होंने लालू-राबड़ी के नाम पर राजद से अलग मोर्चा बनाया और जहानाबाद से प्रत्याशी खड़ा किया। राजद के अधिकृत प्रत्याशी सुरेंद्र यादव के खिलाफ जनसभाएं की। तरह-तरह के आरोप लगाए। वोट नहीं देने की अपील की। तेज प्रताप अगर विरोध की हद पार नहीं किए होते तो जहानाबाद से राजद प्रत्याशी की सबसे कम वोटों (महज 1711) से हार का इतिहास नहीं बनता। उनके प्रत्याशी चंद्रप्रकाश ने आठ हजार वोट काटकर राजद का रास्ता रोक दिया। बिहार में खाता नहीं खुलने दिया।

हर कदम पर कांटे

तेज प्रताप इसके अलावा भी अपने अर्जुन की राह में कांटा बिछाते रहे। चुनाव की पूरी प्रक्रिया के दौरान भाई के फैसले में कमियां निकाल कर दबाव बनाते रहे और अपने पसंदीदा नेताओं के लिए टिकट का जुगाड़ करते रहे। बड़ी बहन मीसा भारती से तेज प्रताप के बागी तेवर को ऊर्जा मिल रही थी। हालांकि पाटलिपुत्र सीट से मीसा भारती की हार के लिए भी एक हद तक तेज प्रताप को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि रोड शो के दौरान राजद कार्यकर्ताओं से उनके झगड़े-झंझट और पार्टी विधायक भाई वीरेंद्र को मंच पर ही अपमानित करने का नकारात्मक असर पड़ा, जिसके चलते भाजपा को कड़ी टक्कर देते हुए भी राजद चुनाव हार गया।

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