सावन में इस तरह शिव आराधना करने से होता है ग्रहों की पीड़ा का नाश

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दैनिक झारखंड न्यूज

रांची । सावन मास में शिव की पूजा से हर तरह के कष्टों से छुटकारा मिलता है। महादेव के स्मरण मात्र से पापों का क्षमण हो जाता है और सुख-समृद्धि से जीवन व्यतीत होकर अंत में मोक्ष प्राप्त होता है। ऐसे में सावन मास में शिव आराधना करने से हर ग्रह की पीड़ा का नाश होता है। इसलिए किसी भी ग्रह की पीड़ा के क्षमण के लिए सावन मास में शिवलिंग की विधिवत आराधना की जाती है। यदि कुंडली में कोई ग्रह खराब है और उसकी दशा चल रही है तो शिव आराधना से पीड़ा का निवारण किया जा सकता है।

सूर्य और शिव

यदि कुंडली में सूर्य की स्थिति खराब है तो सूर्य की दशा में अपयश के साथ आंखों से जुड़े रोग और ह्रदयरोग की संभावना होती है। सूर्य के दोष के निवारण के लिए रोजाना सूर्य को अर्घ्य देने के साथ महामृत्युंजय का जाप लाभकारी होता है।

चंद्र और शिव

चंद्र ग्रह और शिव का सीधा संबंध है। दोनो का वार सोमवार है। चंद्रमा का दोष होने और उसकी दशा आने पर जातक को मन, ह्रदय और अपमृत्यु की समस्या होती है। चंद्रदोष के निवारण के लिए पूर्णिमा को शिव आराधना के साथ शिव सहस्त्रमान का पाठ करना चाहिए।

मंगल और शिव

कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति खराब होने पर मंगल की दशा में व्यक्ति को जेल जाने के साथ, दुर्घटना और शल्य चिकित्सा के योग बनते हैं। मंगल गृह के दोष के निवारण के लिए गरीबों को यथाशक्ति भोजन कराने के साथ बैल का दान और महामृत्युंजय का जाप उत्तम फल देता है।

बुध और शिव

कुंडली में बुध की दशा खराब होने और उसकी दशा होने से मानसिक चिंता, त्वचा के रोग और आर्थिक समस्या पैदा हो जाती है। इसके निवारण के लिए सावन मास में शिवलिग की बिल्वपत्र से पूजा करने के साथ नियमित रूप से रुद्राभिषेक करना चाहिए।

गुरु औऱ शिव

कुंडली में गुरु के खराब होने और उसकी दशा होने से असाध्य और कई रोग लग जाते हैं। इसलिए गुरु ग्रह की शांति के लिए गाय का दान मंदिर में करने के साथ शिवपूजन करना चाहिए।

शुक्र और शिव

शुक्र की दशा ठीक ना होने और उसकी दशा चलने पर से मानव के जीवन में अपयश, अपमान और आंखों के रोग की समस्या होती है। ऐसे में शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करना चाहिए।

शनि और शिव

शनि के खराब होने और उसकी दशा में अपयश, दुर्घटना और लंबी बीमारियों के योग बनते हैं। इसके लिए शिवमंदिरों में दीपदान के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।

राहु और शिव

राहु की दशा खराब होने और उसकी दशा आने पर मानव जीवन में आकस्मिक घटनाएं होती है और असाध्य रोग घेर लेते हैं। राहु की पीड़ा से शांति के लिए शिव मंदिर में जाकर चंद्रशेखराष्टक का पाठ करना चाहिए।

 

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