बिहार में सियासी सरगर्मियां तेज, अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष से डरी हुई है कांग्रेस

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दैनिक झारखंड न्यूज

पटना। विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में सियासी सरगर्मियां तेजी से बढ़ रही हैं। कुछ दिन पहले लालू यादव की पार्टी के पांच सदस्य सत्तारुढ़ जनता दल युनाइटेड (जदयू) के पाले में चले गए थे। अब कांग्रेस में भी फूट का डर सता रहा है। ताजा खबर यह है कि कांग्रेस के 5 विधायक भी जदयू के संपर्क में हैं। इसके अलावा दो और विधायक भी हैं जिन्हें पार्टी मनाने की कोशिश कर रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि JDU ने यह जिम्मेदारी भवन निर्माण मंत्री डॉ. अशोक चौधरी को दी है, जो कभी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। यानी कांग्रेस के लिए घर का भेदी लंका ढहा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, जो विधायक कांग्रेस से बगावत कर सकते हैं, उनमें से 3 के डॉ. अशोक चौधरी से करीबी संबंध हैं। वहीं दो पूर्व में जदयू के साथ ही थे। चर्चा तो यहां तक है कि डॉ. अशोक चौधरी ने जब कांग्रेस छोड़ी, तब ये विधायक भी कांग्रेस को अलविदा कहने की तैयारी में थे, लेकिन संख्या बल नहीं होने और सदस्यता पर होने वाले खतरे को देखते हुए बात बनी नहीं।

बचा सिर्फ दो माह का समय

बता दें, बिहार विधानसभा चुनाव में अब दो महीने से भी कम समय बचा है। नितिश कुमार की पार्टी अब सोची-समझी रणनीति के तहत बचे हुए काम कर रही है, क्योंकि अब सदस्यता जाने-रहने का कोई मतलब नहीं रह गया है। यदि विधायक पार्टी बदलते हैं तो उनकी पेंशन में भी तकनीकी बाधा नहीं है। सूत्रों के अनुसार, इनमें दो विधायक ऐसे हैं जो पूर्व में JDU में ही थे और जिन्हें 2015 के चुनाव में कांग्रेस के निशान पर चुनाव लड़ाया गया था। इनमें एक मुस्लिम बहुत क्षेत्र कटिहार जिले से आते तो दूसरे पड़ोसी झारखंड की सीमा के पास से आते हैं।

कांग्रेस नेता कह रहे ऐसे दावे

बहरहाल, बिहार कांग्रेस के नेता इस तरह की बातों को अफवाह करार दे रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा का कहना है कि चुनाव के वक्त टूट-फूट होती रहती है। यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं। उन्होंने कहा कुछ विधायक बैठक वगैरह में नहीं आते हैं।

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