हार से तनाव में आये लालू, खाना-पीना छोड़ा, काउंसलिंग कर रहे डॉक्टर

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  • डाॅक्टराें ने उनके एंजाइटी से पीड़ित हाेने की आशंका जताई

दैनिक झारखंड न्यूज

रांची । लाेकसभा चुनाव में पार्टी की हार से राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव काफी तनाव में हैं। नतीजों के बाद से वह ठीक से साे नहीं पा रहे हैं। दिन का खाना भी छाेड़ दिया है। रात में भी काफी मुश्किल से खाते हैं। डाॅक्टराें ने उनके एंजाइटी से पीड़ित हाेने की आशंका जताई। लालू चारा घोटाले में सजा काट रहे हैं। राजद ने लोकसभा चुनाव के लिए बिहार में कांग्रेस और रालोसपा के साथ गठबंधन किया था। लेकिन उसे कोई सीट नहीं मिली।

रिम्स के पेइंग वाॅर्ड में भर्ती लालू का इलाज कर रहे मेडिसिन विभाग के प्राेफेसर डाॅ. उमेश प्रसाद ने बताया कि चुनाव नतीजे आने के बाद से लालू की दिनचर्या पूरी तरह से अव्यवस्थित है। वह सुबह नाश्ता करते हैं और फिर रात में बमुश्किल खाना खाते हैं। खाने-पीने का काेई टाइम टेबल नहीं है। इससे इंसुलिन देने में भी दिक्कत आ रही है। अगर जल्दी ही दिनचर्या में सुधार नहीं हुआ ताे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में उनकी काउंसलिंग की जा रही है। समझाया जा रहा है कि समय पर भाेजन करें।

डॉक्टर बोले- दिनचर्या नहीं सुधारी को हालत और खराब होगी

लालू दर्जनभर बीमारियाें से पीड़ित हैं। काफी पहले से उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज है। कार्डियक सर्जरी भी की गई है। हार्ट का वाॅल्व बदला गया है। वह क्राेनिक किडनी फेल्याेर (स्टेज थ्री) से भी पीड़ित हैं। इसके अलावा उन्हें प्राेस्टेट, हाइपर यूरीसिमिया, पेरियेनल इंफेक्शन, किडनी स्टाेन और फैटी लीवर की समस्या भी है। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर लालू ने जल्द दिनचर्या नहीं बदली, तो उनकी स्थिति बिगड़ सकती है।

बार-बार कहते हैं- हतोत्साहित नहीं होना है

शनिवार काे राजद के प्रदेश अध्यक्ष अभय सिंह और लालू प्रसाद की ऑटाेबायाेग्राफी लिखने वाले नलिन वर्मा ने उनसे मुलाकात की। अभय ने कहा कि लालू प्रसाद ठीक से साे नहीं पा रहे हैं। वे बार-बार कहते हैं कि हताेत्साहित नहीं हाेना है। वहीं नलिन वर्मा ने कहा कि उन्हाेंने लालू काे उनकी ऑटाेबायाेग्राफी ‘गोपालगंज टू रायसीना’ साैंपी। इसमें उनकी 50 साल के राजनीतिक जीवन काे दर्शाया गया है। इस किताब में दिखाया गया है कि कैसे एक गरीब व्यक्ति इस ऊंचाई तक पहुंचा।

क्या होता है एंजाइटी

एंजाइटी से पीड़ित व्यक्ति में हमेशा चिंता की स्थिति बनी रहती है। वह अपने आसपास की चीजों और हर दिन की स्थिति से डरने लगता है। इस दौरान तेज धड़कनें, थकान और तेज सांसों से व्यक्ति की घबराहट बढ़ जाती है।

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