JPSC की धांधली : पीएचडी के टॉपिक से मेल नहीं खाते व्‍याख्याता बने अभ्यर्थियों के विषय

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सुनील कमल

हजारीबाग । झारखंड लोक सेवा आयोग ने हर तरह की नियुक्ति में कीर्तिमान गढ़े हैं। चाहे वह सिविल सेवा का मामला हो गया व्‍याख्‍याता नियुक्ति का। सभी में नियम कानून को ताक पर रखकर अपने चहेतो को नियुक्‍त किया।

आयोग ने (विज्ञापन संख्या : 01/2007) के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों में जनवरी, 2008 में 777 व्‍याख्याता की नियुक्ति की थी। इसमें काफी अनियमितता बरती गई। भाई भतीजावाद, पैसे का खेल, पहुंच वाले बड़े-बड़े लोगों के पावर का जम कर दुरुपयोग हुआ। झारखंड बेट नेट एसोसिएशन, पीएचडी धारक शोध संघ और अन्य संगठनों के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति का विरोध किया।

एक लोक जनहित याचिका पर सीबीआई जांच कराने का आदेश कोर्ट ने पारित किया। पूरे मामले की गहनता से जांच के बाद सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट सरकार और कोर्ट को समर्पित कर दिया। जांच में लगभग सभी आरोप सही पाये गये। कुछ अभ्यर्थी जांच में ऐसे भी मिले, जिन्होंने पीएचडी तो किया है लेकिन उनके टॉपिक और विषय मेल ही नहीं खाते। नियमतः पीएचडी और अभ्यर्थी के विषय एक होने चाहिए। यूजीसी ने सख्त हिदायत दे रखे हैं कि जिस विषय के अभ्यर्थी पीएचडी कर रहे हों, उनकी नियुक्ति टॉपिक और विषय के अंदर ही होने चाहिए। आयोग ने नियुक्ति में इसकी अनदेखी की।

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