बढ़ गए टिकट कंफर्म होने के चांस, हाईटेक हो रही है भारतीय रेलवे

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दैनिक झारखंड न्यूज

नई दिल्ली । रेलवे ने तकनीक का प्रयोग कर यात्रियों को बहुत बड़ी राहत दी है। नई तकनीक का इस्तेमाल कर वेस्टर्न रेलवे ने न केवल अपनी कमाई बढ़ाई है, बल्कि रेल टिकट कंफर्म होने की संभावनाएं भी बढ़ा ली हैं। रेलवे की ओर से जारी एक ट्वीट में बताया गया कि हेड ऑन जनरेशन तकनीक (HOG) का इस्तेमाल कर रेलवे ने 57 करोड़ रुपए बचाए हैं। ईंधन की बचत की और प्रदूषण में भी कमी आई। यात्रियों के लिहाज से अच्छी खबर यह है कि इससे फालतू कोच हटे और ज्यादा यात्रियों को जगह मिली। जानिए इसी बारे में –

वेस्टर्न रेलवे के मुताबिक, यहां डीजल से चलने वाली ट्रेनों के ऊपर खास उपकरण लगाए गए और बिजली पैदा की गई। इसी बिजली से ट्रेन के AC और दूसरे इलेक्ट्रिकल सिस्टम चलाए गए।दूसरा बड़ा फायदा यह हुआ कि डीजल वैन के हटाकर यात्री कोच बढ़ा दिए गए, जिससे संबंधित ट्रेन की वेटिंग लिस्ट जल्दी खत्म हो गई और ज्यादा यात्रियों को जगह मिली।

अधिकांश ट्रेनों में HOG तकनीक लागू कर दी गई

WR द्वारा यह तकनीक अपनाए जाने से पहले ट्रेन के AC सिस्टम, लाइट और पंखे चलाने के लिए हर ट्रेन में दो डीजल कार या वैन लगाई जाती थी। अब अधिकांश ट्रेनों में HOG तकनीक लागू कर दी गई और इस साल सितंबर सभी ट्रेनों में इसे लागू करने की योजना है। HOG सिस्टम अपनाने के बाद कार्बन डाई-ऑक्साइड का उत्सर्जन 728 टन प्रति साल प्रति रैक घट गया है।

जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर तक पांच हजार डिब्बों को इस नई तकनीक से बदल दिया जाएगा। इससे डीजल का खर्च सालाना छह हजार करोड़ रुपये कम होगा। अधिकारियों ने बताया कि जनरेटर से ट्रेन में बिजली सप्लाई में बिना AC के डिब्बे में प्रतिघंटे 40 लीटर डीजल की खपत होती है, जबकि AC कोच को बिजली सप्लाई देने में हर घंटे करीब 65-70 लीटर डीजल खर्च होता है।

हाईटेक होती भारतीय रेलवे

भारत में अब GPS से ट्रेनों की मॉनिटरिंग शुरू हो गई है। इस काम में इसरो मदद कर रहा है। यह GPS की तरह एक भारतीय तकनीक है जिसे रियल टाइम इम्फोर्मेशन सिस्टम नाम दिया गया है। इस सिस्टम के तहत सबसे पहले ट्रेन के इंजन में एक डिवाइस लगाई गई है और इंजन की छत पर इसका एंटीना लगा है।

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