RO का पानी पीने वालों के लिए जरूरी खबर, ये हो सकते हैं सेहत को नुकसान

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दैनिक झारखंड न्यूज

नई दिल्ली । अगर आप भी आरओ का पानी पीते हैं तो यह आपके लिए बहुत काम की खबर है। इस बात की बहुत संभावना है साल के अंत तक देश भर के कुछ इलाकों में आरओ प्‍यूरीफायर के पानी पर सरकार रोक लगा दे। रोक लगाने से पहले बकायदा अधिसूचना जारी की जाएगी। इसकी वजह पानी की गुणवत्‍ता और मापदंड हैं जिस आधार पर सरकार यह बड़ा निर्णय लेगी। आज कई घरों में लोग आरओ प्‍यूरीफायर का ही पानी पीते हैं। कार्यालयों में भी इसी पानी का उपयोग पेयजल के रूप में होता है। ऐसे में अगर साल खत्‍म होने तक चिन्हित स्‍थानों में आरओ RO के पानी पर रेाक लग गई तो लोगों को असुविधा हो सकती है क्‍योंकि वे इसके आदी हो चुके होंगे।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने जहां प्रति लीटर पानी में टोटल डिजाल्वड सॉलिड (TDS) का स्तर 500 MG मिलीग्राम से कम है वहां आरओ प्यूरीफायर RO Purifier पर रोक लगाने को कहा है। अधिकरण ने पर्यावरण व वन मंत्रालय को इस साल के अंत तक इस संबंध में अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है।मामले पर अगली सुनवाई अगले साल 25 जनवरी को होगी। NGT एनजीटी प्रमुख जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ मंत्रालय को इस दलील पर और समय देने पर राजी हो गई कि कोरोना वायरस के चलते फिलहाल इस पर आगे बढ़ना मुश्किल है। नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा “एक साल बाद भी मंत्रालय लॉकडाउन के आधार पर समय मांग रहा है। 31 दिसंबर, 2020 तक आवश्यक कार्रवाई पूरी कर लें। TDS का मतलब टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स (कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, सोडियम, बाइकार्बोनेट्स, सल्फेट्स और क्लोराइड्स) होता है।

यह है आरओ के पानी का पैमाना

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक अध्ययन के मुताबिक प्रति लीटर 500 MG मिलीग्राम टीडीएस से कम स्तर वाले पानी से RO Purifier आरओ प्यूरीफायर महत्वपूर्ण खनिज निकाल देता है और पानी की भी बर्बादी होती है। अध्ययन के मुताबिक प्रति लीटर पानी में 300 मिलीग्र्राम टीडीएस TDS के स्तर को सबसे अच्छा माना जाता है। प्रति लीटर में 900 MG मिलीग्राम के स्तर को खराब और 1200 MG मिलीग्राम और उससे अधिक के स्तर को अस्वीकार्य माना जाता है।

ये हो सकते हैं सेहत को नुकसान

निर्धारित मापदंड से कम टीडीएस का आरओ पानी पीने से स्‍वाथ्‍यगत समस्‍यांए बढ़ सकती हैं। ये हो सकती हैं समस्याएं दिल की बीमारियां, थकान, मांसपेशियों में जकड़, ऐंठन, अक्‍सर रहने वाला सिरदर्द, ऑस्टियोपोरोसिस, ऑस्टियोऑर्थराइटिस, ऑस्टियोपीनिया, रिकैट्स आदि रोग पनप सकते हैं।

इतने TDS पर होना चाहिये बोरिंग का पानी

जानकारों का कहना है कि आमतौर पर 45 TDS के स्‍तर का पानी ठीक माना जाता है। मनुष्‍य का शरीर 500 TDS तक सहन करने की क्षमता रखता है। गत वर्ष यूरोप में कई शिशुओं की अचानक मौत के केस सामने आए थे। इसकी वजह आरओ पानी का उपयोग करना ही था। इस पानी में जरूरी मिनरल्स नहीं थे। बोरिंग के पानी के लिए आरओ बेहद जरूरी है, लेकिन अगर आपने TDS टीडीएस का स्‍तर मेंटेन नहीं रखा तो नुकसान हो सकता है। RO में यह ऑप्शन होता है कि आप इसके मेंब्रेन को 45 TDS पर मेंटेन कर सें। अक्‍सर कई लोग RO को जीरो TDS पर मेंटेन रखते हैं।

प्राकृतिक पानी से मजबूत होता है इम्यूनिटी सिस्टम

विशेषज्ञों की मानें तो प्राकृतिक जल हमारे लिए खूबियों का भंडार है। इसमें मिनरल्स होते हैं जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखते हैं। RO के कारण पानी से मिलने वाले मिनरल्स की मात्रा में कमी भी आ रही है और साथ ही इम्यूनिटी भी कमजोर हो रही है। यही वजह है कि कम उम्र में ही हड्डी और एलर्जी से संबंधित बीमारियां सामने आने लगी हैं। डॉक्‍टर अक्‍सर मरीज को RO के पानी के स्थान पर नॉर्मल प्युरीफायर का पानी, क्लोरीन या फिर उबला पानी पीने की सलाह देते हैं।

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