चुनाव आयोग ने दिए तीन IPS पर एफआइआर के निर्देश

0
  • आर्थिक अपराध और चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल के मामले में आरोपी बनाया जाए

दैनिक झारखंड न्यूज

भोपाल । पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। कांग्रेस सरकार के दौरान उनके सहयोगी आरके मिगलानी, प्रवीण कक्कड़, अश्विन शर्मा सहित अन्य के यहां मारे गए छापों की रिपोर्ट पर भारत निर्वाचन आयोग ने कमल नाथ के पसंदीदा भारतीय पुलिस सेवा के तीन अधिकारी और राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्य प्रदेश से कहा है कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की रिपोर्ट में शामिल अन्य लोगों को आर्थिक अपराध और चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल के मामले में आरोपी बनाया जाए। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक आइपीएस अधिकारियों में सुशोवन बनर्जी, संजय वी माने, वी मधुकुमार और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अरुण कुमार मिश्रा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के भी आदेश दिए गए हैं।

लोकसभा चुनाव से पहले पड़े थे आयकर छापे

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले आयकर विभाग ने छापे की कार्रवाई को अंजाम दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के सलाहकार आरके मिगलानी, विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी प्रवीण कक्कड़, एनजीओ संचालक अश्विन शर्मा सहित अन्य से जुड़े व्यक्तियों के 52 ठिकानों पर छापे मारे गए थे। इसमें चुनाव के दौरान कालेधन के इस्तेमाल का राजफाश हुआ था।

281 करोड़ का मिला था हिसाब 

2019 में सीबीडीटी के हवाले से बताया गया था कि कर चोरी करने वाले रसूखदारों के यहां से संदिग्ध भुगतानों सहित 14.6 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी मिली थी। तब डायरी और कंप्यूटर फाइलें बरामद की गई थीं। इसकी रिपोर्ट सीबीडीटी ने चुनाव आयोग को सौंपी थी। सूत्रों के मुताबिक इसमें 20 करोड़ रुपये की नकदी तुगलक रोड स्थित आवास से एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के मुख्यालय पहुंचाई गई। छापे में ट्रांसफर, पोस्टिंग से जुड़े लेन-देन के दस्तावेज भी मिले थे। इसमें यह बात भी सामने आई थी कि लगभग 281 करोड़ रुपये जमा किए गए और हवाला के माध्यम से रकम को यहां-वहां भेजा गया।

निशाने पर तीन आइपीएस

न्यूज एजेंसी के मुताबिक चुनाव आयोग ने 28 अक्टूबर, 2020 को सीबीडीटी रिपोर्ट की प्रतिलिपि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्य प्रदेश को निर्वाचन सहित अन्य प्रासंगिक कानून में आपराधिक कार्रवाई करने के लिए भेजने के निर्देश दिए थे। आइपीएस अधिकारियों में सुशोवन बनर्जी, संजय वी माने, वी मधुकुमार और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अरुण मिश्रा के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। चुनाव आयोग के अवर सचिव पवन दीवान ने बुधवार को प्रेसनोट जारी किया, जिसमें मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने को कहा है।
इनकी 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कालेधन के इस्तेमाल में कथित भूमिका आयकर विभाग की कार्रवाई में सामने आई थी। आयोग ने केंद्रीय गृह सचिव को आइपीएस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए कहा है। वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। सीबीडीटी की रिपोर्ट ने आयोग को कुछ संस्थाओं और व्यक्तियों के बारे में सूचित किया है, जो बेहिसाब नकदी जमा करने में शामिल थे।

रसूखदारों पर सीईओ को दर्ज कराना है एफआइआर

चुनाव आयोग ने मप्र के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से कहा है कि सीबीडीटी की रिपोर्ट के आधार पर जो अन्य रसूखदार इस कृत्य में शामिल हैं,उनके नाम चिन्हित कर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराए। माना जा रहा है कि अब तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कई दिग्गजों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मामले के बारे में मप्र की सीईओ वीरा राणा और मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने न तो फोन पर जवाब दिया और न ही एसएमएस का उत्तर आया।

छवि खराब करने की साजिश

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि यह पुराना और खत्म हो चुका झूठा मामला है। भाजपा जानबूझकर कांग्रेस की छवि को खराब करने के लिए साजिश कर रही है। यदि इस मामले में सधााई होती तो जिन्हें आज दोषी बताया जा रहा है, उन लोगों पर पहले ही कार्रवाई हो गई होती।
Leave A Reply

Your email address will not be published.