अलकतरा घोटाला : छह साल बाद तीन इंजीनियरों को हुई सजा

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दैनिक झारखंड न्यूज

सिमडेगा। 1.21 करोड़ रुपए के अधिक के अलकतरा घोटाले में दोषी करार ग्रामीण कार्य विभाग (आरडब्ल्यूडी) सिमडेगा के तत्कालीन तीन इंजीनियरों को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों पर 1.15 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर तीनों को अतिरिक्त ढाई साल जेल काटनी होगी। शनिवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसके पांडेय की अदालत ने जालसाजी एवं भ्रष्टाचार के आरोप में इंजीनियर उपेंद्र कुमार सिंह(49), उमेश पासवान(58) व राजबलि राम(65)को दोषी पाया था। तीनों बिहार के पटना व नालंदा के मूल निवासी हैं। अभियुक्त राजबलि राम एनआरईपी लोहरदगा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जबकि उमेश पासवान आरडब्ल्यूडी लातेहार में एवं उपेंद्र  सिंह ग्रामीण विभाग मुंगेर(बिहार) में पदस्थापित हैं। वहीं कंपनी के एमडी पवन कुमार सिंह का निधन सुनवाई के दौरान हो चुका है।

सीबीआई  ने 2009 में 16 प्राथमिकी दर्ज की

हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने राज्य में हुए अलकतरा घोटाले में वर्ष 2009 में एक साथ 16 प्राथमिकियां दर्ज कर तफ्तीश की थी। इसमें से पांच मामलों में फैसला आ चुका है। 11 मामले में सुनवाई जारी है। गौरतलब है कि कांड संख्या आरसी 21/2009 सिमडेगा के कुरडेग से कुतमाकछा गांव की सड़क मरम्मत से जुड़ा है। इसका काम मेसर्स क्लासिक कोल कंस्ट्रक्शन को 2004-05 में आरडब्ल्यूडी सिमडेगा से मिला था। सड़क की कुल लंबाई 16.9 किमी थी। इसके लिए विभाग ने 1,28,32,497 रुपए का आवंटन किया था। जिसमें अलकतरा का उठाव सरकारी तेल कम्पनी से करने का शर्त था। लेकिन कंपनी ने बिना अलकतरा उठाव किये 267.13 मीट्रिक टन  के 30 फर्जी चालान विभाग में जमा कर 1,21,72,110 रुपए का भुगतान प्राप्त किया। फर्जी चालान को पास करने में इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसकी जांच में सीबीआई को लगभग छह साल लगे थे।

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