मजबूत हौसले के धनी हैं बोकारो के दिव्यांग उपायुक्त राजेश कुमार, जानिये उनके प्रेरणादायी जीवन को

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  • भारतीय क्रिकेट टीम का किया प्रतिनिधित्व।
  • जल संरक्षण पर लिख चुके हैं किताब।

दैनिक झारखंड न्यूज

बोकारो/रांची झारखंड कैडर के IAS अधिकारी राजेश कुमार सिंह की दृष्टि बाधित जरूर है लेकिन यह समस्‍या उनके आड़े नहीं आते। वे अपना काम तन्‍मयता से जारी रखते हैं। वे बोकारो में उपायुक्‍त के पद पर पदस्‍थ हैं। उनकी आंखों में महज 10 प्रतिशत रोशनी है। इसके बूते पर ही वे कामकाज करते हैं। क्रिकेट का उन्‍हें बड़ा शौक है। एक बार क्रिकेट खेलते समय गेंद पकड़ने की कोशिश में वे कुंए में गिरकर जख्‍मी हो गए थे। इस दुर्घटना में उनकी आंखों की रोशनी चली गई लेकिन क्रिकेट के प्रति उनकी लगन और सकारात्‍मकता बरकरार रही। जानिये उनके प्रेरणादायी जीवन की कुछ खास बातें।

अब तक का सफर

2007 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफल होने के बाद UPSC ने राजेश कुमार सिंह को IAS बनाने पर आपत्ति की। उच्चतम न्यायालय तक मुकदमा लड़ा। आखिरकार उच्चतम न्यायालय ने उन्हें आइएएस के लिए योग्य माना। 2010 में उनका चयन IAS के लिए हुआ। पहले असम कैडर दिया गया। फिर झारखंड कैडर दिया गया। उसके बाद हमेशा सचिवालय में रहे। किसी सरकार ने उपायुक्त बनाने पर विचार नहीं किया। अब पहली बार बोकारो का उपायुक्त (Bokaro Deputy Commissioner Rajesh Kumar Singh) बनाया गया है। राजेश कुमार सिंह कहते हैं, सरकार की प्राथमिकता ही सब कुछ है। संवेदनशील प्रशासन देना दायित्व है।

जल संरक्षण पर लिख चुके हैं किताब

राजेश कुमार सिंह किताब लिखने के शौकीन हैंं। उनकी पहली पुस्तक ‘पुटिंग द आइ इन आइएएस’ है। इस पुस्तक को पाठकों की सराहना मिली तो उत्साह बढ़ा। दृष्टि नहीं, दृष्टिकोण चाहिए शीर्षक से उस किताब का हिन्दी संस्करण भी लिखे हैं। और भी कई किताबों की रचना करने के बाद अब जल संरक्षण पर अगली पुस्तक लिख रहे हैं। उनकी किताबें एमेजन व फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां बेच रही हैं। ‘
भारतीय क्रिकेट टीम का किया प्रतिनिधित्व

राजेश याद करते हैं कि छह साल के थे तो क्रिकेट की बाल को कैच करने में कुआं में गिर गए थे। रोशनी चली गयी। फिर भी क्रिकेट के प्रति प्रेम कायम रहा। 1998, 2002 और 2006 में दिव्यांगों के लिए आयोजित विश्व कप प्रतियोगिता में उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया।

अटल जी की कविता ‘गीत नया गाता हूं’ से प्रेरित

राजेश कुमार सिंह का जीवन किसी फिल्म की कहानी की तरह है। छोटे थे तो क्रिकेट खेलने में आंखों की रोशनी गंवा दी। मगर उन्हें जीवन का लक्ष्य हमेशा बिल्कुल स्पष्ट दिखता रहा। जब कभी निराश होते थे तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की यह कविता सुनते थे अथवा गुनगुनाते थे, ‘हार नहीं मानूंगा रार नहीं ठानूंगा काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता हूं।’ अटलजी की यह कविता उन्हें मंजिल की ओर बढऩे के लिए प्रेरित करती रही।

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