बंगाल सरकार जून 2021 तक गरीबों को देगी मुफ्त राशन, केंद्र पर तंज भी कसा

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दैनिक झारखंड न्यूज

कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन में गरीबों के लिए जारी मुफ्त राशन की योजना (प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना) को नवंबर तक बढ़ाने की घोषणा की। इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी बड़ी घोषणा की। सीएम ममता ने गरीब को मिलने वाले फ्री राशन की योजना को राज्य में अगले साल जून तक जारी रखने की घोषणा की है।

बता दें कि इससे पहले सीएम ममता ने लॉकडाउन शुरू होने के समय प्रदेश के 8 करोड़ से ज्यादा गरीब परिवारों को 6 महीने तक मुफ्त राशन देने की घोषणा की थी। सीएम ममता ने अप्रैल में इसकी घोषणा की थी। ऐसे में सितंबर माह तक लोगों को इस योजना का लाभ मिलेगा। पर ममता बनर्जी की घोषणा के बाद अब इस योजना का लाभ सितंबर से बढ़कर जून 2021 तक हो गया है। ऐसे में गरीब परिवारों को जून 2021 तक राज्य सरकार की ओर से मुफ्त में राशन मिलेगा।

केंद्र पर तंज भी कसा

पीएम मोदी के संबोधन के कुछ देर बाद ही ममता बनर्जी ने घोषणा की कि बंगाल सरकार जून 2021 तक गरीबों को मुफ्त राशन देगी। केवल इतना ही नहीं अपरोक्ष रूप से उन्होंने केंद्र सरकार पर तंज भी कसा। ममता ने कहा – राज्य के राशन की गुणवत्ता केंद्र की तुलना में ज्यादा अच्छा होता है। साथ ही केंद्र का राशन राज्य में केवल 60 फीसदी लोगों तक ही पहुंचता है, जबकि राज्य सरकार का राशन हर गरीब तक पहुंचता है।

पीएम ने की ये घोषणा

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने गरीब कल्याण अन्न योजना को नवंबर अंत तक विस्तारित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब दीपावाली और छठ पर्व तक 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज मिलेगा और इस पर 90 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां बारिश के बाद ही कृषि क्षेत्र में ज्यादा काम होता है। वहीं जुलाई के बाद से त्योहारों का माहौल भी बनना शुरू हो जाता है। त्योहारों के समय जरूरतें और खर्च भी बढ़ता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने गरीब कल्याण अन्न योजना को दीपावाली और छठ पूजा यानि नवंबर के अंत तक बढ़ा दिया है।

ममता ने दी चेतावनी

इधर सीएम ममता ने राज्य में एक जुलाई से शुरू हो रहे अनलॉक 2 के लिए कई छूटों की भी घोषणा की। उन्होंने निजी बस ऑपरेटरों को चेतावनी भी दी कि मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए जनहित में वे किराया बढ़ाने की मांग छोड़ दें। बता दें कि पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और ममता की इस घोषणा को चुनावी कवायद के तौर पर ही देखा जा रहा है।

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