सात सूखाग्रस्त जिलों के 11 लाख किसानों को नहीं मिल पाएगा मुआवजा, जानें क्यों

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दैनिक झारखंड न्यूज

रांची राज्य के सात सूखाग्रस्त जिलों के करीब 11 लाख किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाएगा। केंद्र ने इन जिलों के पीड़ित किसानों को मुआवजा देने से इनकार कर दिया है। पिछले वर्ष सात जिलों के 55 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। इसके बाद इन किसानों को खासकर लॉकडाउन की अवधि में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी।

इसमें 17 प्रखंडों को गंभीर और 38 को मध्यम रूप से सूखाग्रस्त प्रखंड के रूप में चिह्नित किया गया था। लेकिन केंद्र ने राज्य सरकार के इस आवेदन को यह कहकर लौटा दिया कि सरकार ने समय पर आवेदन नहीं दिया। इसके बाद कृषि विभाग अब फिर से केंद्र को इन किसानों की स्थिति के साथ आवेदन देने की प्रक्रिया में है।

केंद्र को फिर से अनुरोध किया जाएगा कि वह किसानों की हालत देख उन्हें मुआवजा की राशि दे

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख बताते हैं कि देर से फाइल जाने के पीछे जो भी दोषी होंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी। केंद्र को फिर से अनुरोध किया जाएगा कि वह किसानों की हालत देख उन्हें मुआवजा की राशि दे। इसमें किसानों की कोई गलती नहीं है और उन्हें इसका हक मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि किसान मेहनत कर अन्न उगाता है और जब सूखा में उसे नुकसान उठाना पड़ता है तो उसकी व्यथा कोई दूसरा नहीं समझ सकता। लॉकडाउन में जो आर्थिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ा है उसे केंद्र को समझने की जरूरत है ताकि लाखों किसानों को मुआवजा मिल सके।

कितना मिलता मुआवजा

सूखाग्रस्त क्षेत्र में आपदा की ओर से पीड़ित किसानों को दो श्रेणी में मुआवजा दिया जाता है। इसमें सिंचित भूमि वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 13,500 और असिंचित भूमि वाले को 6,500 रुपये मुआवजे की राशि मिलती। सरकार की जो गाइडलाइन में उसी के आधार पर भुगतान किया जाता है।

2018 के पीड़ितों को साल भर बाद मिलना शुरू हुआ था मुआवजा

वर्ष 2018 में 18 जिले के 129 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित किया था, जिसमें 93 प्रखंडों को गंभीर और 36 को मध्यम रूप से सूखाग्रस्त प्रखंड के रूप में चिह्नित किया गया। लेकिन इन जिलों के पीड़ित किसानों को मुआवजा मिलने में सालभर से अधिक समय का इंतजार करना पड़ा। हालांकि मुआवजा देना शुरू हुआ, लेकिन फिर भी अभी तक हर प्रभावित किसानों को इसका लाभ पूरा नहीं मिल पाया है।

पिछली सरकार ने प्रक्रिया में देर की

पिछली रघुवर सरकार ने सूखाग्रस्त जिलों को मुआवजा देने की फाइल कैबिनेट में भेजी ही नहीं। इसके कारण भी यह समस्या उत्पन्न हुई। मंत्री बादल ने बताया कि जब वे मंत्री बने तो सबसे पहले मुआवजे को लेकर फाइल की जानकारी ली,  लेकिन उसके आपदा प्रबंधन विभाग में ही होने की बात सामने आयी। इसके बाद सारी प्रक्रिया पूरी कर कैबिनेट से इसे अप्रैल में पारित कराया गया और इसके बाद इसे केंद्र के आपदा प्रबंधन को भेजा गया।

सात जिलों में कम बारिश दर्ज की गई थी

अप्रैल में हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य के सात जिलों के 55 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। वर्ष 2019 के प्रारंभ में मानसून के आगमन में देरी और प्रारंभ कमजोर होने के कारण बोकारो, चतरा, पाकुड, देवघर, गिरीडीह, गोड्डा और हजारीबाग के 55 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया। इन प्रखंडो में 530 मिलीमीटर की जगह 333 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई थी।

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